- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
- 13 साल बाद बने दुर्लभ संयोग में उज्जैन में उमड़ा आस्था का सैलाब, शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या पर देशभर से पहुंचे श्रद्धालु; शनि मंदिर में स्नान के बाद कर रहे दान-पुण्य
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया रामघाट क्षेत्र का निरीक्षण, कहा— विकास कार्यों का लाभ लंबे समय तक मिलेगा
- उज्जैन में ऑनलाइन जुड़ा देश, मोनी तीर्थ आश्रम में हुआ “विशेष श्री बालाजी सर्व ग्रह दोष शांति यज्ञ”; हर्षानंद और संतों ने दी आहुतियां
- पीएम की अपील और सीएम के निर्देश के बाद उज्जैन प्रशासन की नई पहल, अब एक ही वाहन से सिंहस्थ निरीक्षण पर निकल रहे अधिकारी
उपशास्त्रीय एवं भक्ति संगीत में गायकी से किया मंत्रमुग्ध
स्वर-संवाद सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था उज्जैन द्वारा संगीत रसिक श्रोताओं के लिये 24 अक्टूबर को पद्मश्री स्व. डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की स्मृति में दिवाळी पहाट का उपशास्त्रीय एवं भक्ति संगीत का आयोजन अभिरंग नाट्यगृह, कालिदास अकादमी में हुआ। अतुल मुजुमदार ने बताया कि प्रात: 8 बजे शुरू हो कर लगभग दो घंटे चले इस कार्यक्रम में पुणे से आए किराना घराने के प्रसिद्ध कलाकार पं. संजय गरुड़ ने अपनी गायकी से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। पं. संजय ने राग मियां की तोड़ी में विलंबित एक ताल बड़ा खय़ाल गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की,
फिर छोटा खय़ाल एवं उसके बाद पं. भीम सेन जोशी द्वारा गाये भजन बाजे रे मुरलिया बाजे, तीर्थ विठ्ठल-क्षेत्र विठ्ठल एवं पं. जितेंद्र अभिषेकी द्वारा गाया गीत हे सुरांनो चंद्र व्हा प्रस्तुत किये। अंत में जो भजे हरी को सदा भजन गाकर पं. संजय गरुड अपने गायन को विराम दिया। संवादिनी में डॉ. विवेक बंसोड़, तबले के साथ हितेंद्र दीक्षित, झांझ के साथ विश्वास चंदोलीकर, और हार्मोनियम के साथ अनुश्री बंसोड एवं कल्याणी सुगंधी ने संगत दी। संचालन सौ. दाक्षायणी पळशीकर ने किया।